• Home
  • News
  • Uttarakhand: India-China Trade to Resume via Lipulekh Pass! Border Economy to Receive a Lifeline.

उत्तराखंड: लिपुलेख दर्रे से फिर शुरू होगा भारत-चीन व्यापार! सीमांत अर्थव्यवस्था को मिलेगी संजीवनी

  • Tapas Vishwas
  • March 19, 2026 09:03 AM
Uttarakhand: India-China Trade to Resume via Lipulekh Pass! Border Economy to Receive a Lifeline.

देहरादून। उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ से जुड़ा ऐतिहासिक लिपुलेख दर्रा एक बार फिर भारत-चीन सीमा व्यापार के लिए खुलने जा रहा है। वर्ष 2026 में इस पारंपरिक व्यापार को पुनः शुरू करने की तैयारियां तेज हो गई हैं, जिससे सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है। इसी क्रम में पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में व्यापार सत्र की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई और सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए। विदेश मंत्रालय से निर्देश मिलने के बाद प्रशासन ने इस कार्य को प्राथमिकता में रखा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह व्यापार केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्रों के सामाजिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक जीवन से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

बैठक में बताया गया कि भारत-चीन के बीच हुए समझौते के तहत यह व्यापार सामान्यतः जून से सितंबर के बीच संचालित होता है। हालांकि, हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए इसमें बदलाव संभव है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि यदि मौसम अनुकूल रहा तो व्यापार अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाए, ताकि अधिक से अधिक व्यापारी इसका लाभ उठा सकें। व्यापार में भाग लेने वाले व्यापारियों के लिए ट्रेड पास की व्यवस्था को लेकर भी चर्चा की गई। पिछली बार 265 व्यापारियों को पास जारी किए गए थे, जबकि इस वर्ष संख्या बढ़ने की संभावना है। प्रशासन का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक स्थानीय व्यापारी इस अवसर से जुड़ सकें। सीमा व्यापार के सुचारू संचालन के लिए बैंकिंग और कस्टम व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। भारतीय स्टेट बैंक द्वारा धारचूला क्षेत्र में नकद और मुद्रा विनिमय की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि कस्टम विभाग की तैनाती भी समय से सुनिश्चित की जाएगी। यह व्यापार पारंपरिक वस्तुओं पर आधारित है। तिब्बत से ऊन, पश्मीना, नमक, बोरेक्स, रेशम, याक के बाल और खाल जैसी वस्तुएं आयात की जाती हैं, जबकि भारत की ओर से कपड़े, मसाले, कृषि उत्पाद, जूते, तांबे के सामान और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं निर्यात की जाती हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर बढ़ते हैं। पिछले व्यापार सत्र के आंकड़ों के अनुसार लगभग 1.25 करोड़ रुपये का निर्यात और 1.90 करोड़ रुपये का आयात हुआ था, जो इस व्यापार की आर्थिक उपयोगिता को दर्शाता है। प्रशासन ने इस बार बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, संचार, बिजली, पेयजल और ठहरने की सुविधाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए हैं। बीएसएनएल को नेटवर्क कनेक्टिविटी सुधारने के लिए कहा गया है, ताकि व्यापारियों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय बना रहे। साथ ही गुंजी क्षेत्र में शौचालय और अन्य आधारभूत सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। लिपुलेख दर्रे से शुरू होने वाला यह व्यापार केवल वस्तुओं के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीमांत क्षेत्रों के समग्र विकास का माध्यम भी है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। प्रशासन को उम्मीद है कि वर्ष 2026 का व्यापार सत्र सफल रहेगा और सीमांत क्षेत्रों में विकास की नई राह खोलेगा।


संबंधित आलेख: