ऋषिकेश में गंगा तट पर बनेगा प्री-वेडिंग डेस्टिनेशन, मिलेगा समुद्री बीच जैसा अनुभव
ऋषिकेश। स्वर्गाश्रम क्षेत्र जल्द ही एक नए पर्यटन आकर्षण के रूप में उभरने जा रहा है। नगर पंचायत स्वर्गाश्रम ने यहां गंगा तट को प्री-वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की पहल शुरू कर दी है। इस योजना के तहत देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को प्री-वेडिंग शूट के लिए आकर्षित किया जाएगा, जिससे उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिलेगा।
नगर पंचायत की पिछली बोर्ड बैठक में पर्यटन को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इसके बाद अब प्री-वेडिंग डेस्टिनेशन के लिए स्थान का चयन भी कर लिया गया है। स्वर्गाश्रम के वार्ड नंबर-तीन स्थित शिव-गंगा तट को इस परियोजना के लिए उपयुक्त माना गया है। इस स्थान की खासियत यह है कि यहां गंगा किनारे फैले रेतीले तट समुद्री बीच जैसा अनुभव कराते हैं। यही वजह है कि यहां समय बिताना पहले से ही देशी और विदेशी पर्यटकों को काफी आकर्षित करता है। अब इसे व्यवस्थित रूप से विकसित कर प्री-वेडिंग शूटिंग के लिए तैयार किया जाएगा। नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि इस परियोजना के तहत किसी स्थायी निर्माण कार्य की योजना नहीं है। गंगा तट के प्राकृतिक स्वरूप को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए अस्थायी सजावट की जाएगी, ताकि पर्यावरण को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। साथ ही, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सख्त नियम लागू किए जाएंगे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार, प्री-वेडिंग स्थल के पास एक विशेष सेल्फी प्वाइंट भी विकसित किया जाएगा। इसमें उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक कला और पहचान को दर्शाने वाले चित्र लगाए जाएंगे, जिससे पर्यटक न केवल फोटो शूट कर सकें, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक झलक भी अपने साथ ले जा सकें। गौरतलब है कि ऋषिकेश का स्वर्गाश्रम क्षेत्र पहले से ही योग, ध्यान और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां स्थित परमार्थ निकेतन की भव्य गंगा आरती देश-विदेश में खास पहचान रखती है। ऐसे में इस नए प्रयास से पर्यटन को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। नगर पंचायत का मानना है कि प्री-वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित होने के बाद स्वर्गाश्रम न केवल एक आध्यात्मिक स्थल रहेगा, बल्कि आधुनिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बन सकेगा। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।