मलिन बस्ती और वन भूमि मुद्दे पर हरीश रावत का सरकार पर हमला, 25 फरवरी को गांधी पार्क में धरने का ऐलान
देहरादून। इंडिया गठबंधन की ओर से कांग्रेस भवन में आयोजित संयुक्त प्रेसवार्ता में प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई। प्रेसवार्ता में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य सरकार पर मलिन बस्तियों और वन भूमि पर बसे लोगों के मुद्दे पर गंभीर आरोप लगाए और 25 फरवरी को गांधी पार्क में धरना देने का ऐलान किया।
हरीश रावत ने कहा कि भाजपा सरकार पिछले कई वर्षों से वन भूमि पर निवास कर रहे लोगों को मालिकाना हक देने के बजाय उन्हें उजाड़ने की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण हजारों परिवार असुरक्षा और भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं। रावत ने स्पष्ट मांग की कि बिंदुखत्ता, गांधीग्राम, बागजाला और टोंगिया गांव को तत्काल राजस्व ग्राम घोषित किया जाए, ताकि वहां के निवासियों को स्थायी अधिकार मिल सकें। उन्होंने कहा कि मलिन बस्तियों में रहने वाले लोग वर्षों से मूलभूत सुविधाओं और कानूनी मान्यता के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के बजाय नोटिस और कार्रवाई की भाषा बोल रही है। इंडिया गठबंधन का आरोप है कि सरकार संवेदनशील मुद्दों पर ठोस निर्णय लेने से बच रही है। इंडिया गठबंधन ने ऐलान किया है कि 25 फरवरी को देहरादून के गांधी पार्क में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार और विपक्षी दलों के नेता शामिल होंगे। रावत ने कहा कि यह आंदोलन केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की लड़ाई है। प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में और गर्मी बढ़ने के संकेत हैं, क्योंकि मलिन बस्तियों और वन भूमि पर बसे लोगों का सवाल सीधे हजारों परिवारों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।