इंसानियत शर्मसार: 19 साल की बेटी की चिता के लिए नसीब नहीं हुई सूखी लकड़ी, गीली लकड़ियों के बीच टायर और डीजल जलाकर दी अंतिम विदाई
श्रीनगर (गढ़वाल)। देवभूमि के श्रीनगर स्थित अलकेश्वर घाट पर शनिवार को एक ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया, बल्कि मुनाफाखोरी की अंधी दौड़ में मर चुकी इंसानियत को भी उजागर किया। एक अभागे पिता को अपनी 19 वर्षीय जवान बेटी की अर्थी को कंधा देने का असह्य दुख तो था ही, लेकिन अंतिम संस्कार के वक्त जो बेबसी उसे झेलनी पड़ी, उसने पूरे शहर को आक्रोशित कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, श्रीनगर के वार्ड संख्या 12 की रहने वाली एक 19 वर्षीय युवती के आकस्मिक निधन के बाद परिजन गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार के लिए अलकेश्वर घाट पहुंचे थे। घाट पर नगर निगम या सरकारी लकड़ी की टाल की सुविधा न होने के कारण, परिजनों को मजबूरी में एक निजी टाल संचालक से संपर्क करना पड़ा। संचालक ने आपदा और शोक के इस क्षण का फायदा उठाते हुए मनमाने दामों पर तीन क्विंटल लकड़ी बेची। जब भारी मन से परिजनों ने अपनी लाडली की चिता को मुखाग्नि दी, तो लकड़ियों ने आग ही नहीं पकड़ी। संचालक ने पूरे पैसे वसूलने के बावजूद परिजनों को पूरी तरह गीली और कच्ची लकड़ियां थमा दी थीं। अपनी फूल जैसी बच्ची के शव को जलती चिता के बजाय धुएं और अधजली लकड़ियों के बीच पड़ा देख परिजनों का कलेजा फट पड़ा। शोक संतप्त परिवार करीब चार घंटे तक घाट पर लाचारी और बेबसी की हालत में सिसकता रहा, लेकिन गीली लकड़ियां सुलगती रहीं, जली नहीं। हिंदू रीति-रिवाजों और मानवीय गरिमा के विरुद्ध जाकर, अंततः थक-हारकर परिजनों को एक कठोर कदम उठाना पड़ा। जब तमाम कोशिशें नाकाम रहीं, तो बाजार से 15 लीटर डीजल मंगवाया गया। इसके साथ ही करीब 10 पुराने टायर, ट्यूब और पुराने कपड़ों को चिता पर डाला गया, तब जाकर कहीं अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो सकी। आस्था और विदाई के इस पवित्र क्षण में टायर और डीजल का प्रयोग समाज और प्रशासन की व्यवस्था पर एक बड़ा तमाचा है। इस शर्मनाक घटना के बाद स्थानीय जनता में भारी उबाल है। वार्ड संख्या 12 के पार्षद शुभम प्रभाकर ने इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए नगर निगम प्रशासन को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि शोक संतप्त परिवारों की मजबूरी का फायदा उठाने वाले निजी टाल संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और घाट पर सरकारी दर पर सूखी लकड़ी उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि श्रीनगर जैसे प्रमुख केंद्र में घाट की यह दुर्दशा प्रशासन की उदासीनता को दर्शाती है। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।