उत्तराखंड चारधाम यात्रा: 19 अप्रैल से शुरू होगा श्रद्धा का सैलाब, मेडिकल यूनिवर्सिटी ने जारी की हेल्थ एडवाइजरी
देहरादून। विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का आगाज आगामी 19 अप्रैल से होने जा रहा है। आस्था के इस महापर्व में शामिल होने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचेंगे। हालांकि, उच्च हिमालयी क्षेत्रों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ऑक्सीजन की कमी के कारण हर साल सैकड़ों श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसी संवेदनशीलता को देखते हुए एचएनबी उत्तराखंड मेडिकल यूनिवर्सिटी ने विशेषज्ञों की सलाह पर एक विस्तृत 'ट्रैवल एडवाइजरी' जारी की है, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से दर्शन कर सकें। यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित 'स्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा' सेमिनार में विशेषज्ञों ने बताया कि चारधामों की अत्यधिक ऊंचाई (केदारनाथ 3584 मीटर, बदरीनाथ 3133 मीटर, गंगोत्री 3140 मीटर और यमुनोत्री 3293 मीटर) पर वायुदाब कम हो जाता है। समुद्र तल की तुलना में 3050 मीटर की ऊंचाई पर ऑक्सीजन मात्र 69 फीसदी रह जाती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर (SpO2) गिरकर 88 से 91 फीसदी तक पहुंच सकता है, जिसे 'हाइपोक्सिया' कहा जाता है। यही कारण है कि यात्रा के दौरान हर साल करीब 250 श्रद्धालुओं की हृदय गति रुकने से मौत हो जाती है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शरीर को वातावरण के अनुकूल ढालने (Acclimatization) के लिए समय देना अनिवार्य है। एडवाइजरी में मुख्य सुझाव दिए गए हैं। 2,500 मीटर से ऊपर जाने पर प्रतिदिन 300-500 मीटर से अधिक की चढ़ाई न करें। यात्रा के शुरुआती 48 घंटों में भारी शारीरिक परिश्रम से बचें। 2,450 से 2,750 मीटर की ऊंचाई पर 2-3 रातें बिताने से 'एक्यूट माउंटेन सिकनेस' का खतरा कम हो जाता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि संभव हो तो शाम को कम ऊंचाई वाले स्थान पर लौटकर सोएं। 3,000 मीटर से ऊपर पहुंचने पर हर 1,000 मीटर की बढ़त के बाद एक दिन का अतिरिक्त विश्राम लें। एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया है कि मधुमेह , उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मिर्गी, अस्थमा और सीओपीडी से पीड़ित मरीजों को यात्रा शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से अनिवार्य रूप से परामर्श लेना चाहिए। साथ ही, 35 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों और 45 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को सलाह दी गई है कि वे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जाने से पहले अपनी संभावित बीमारियों की पूरी जांच करा लें, क्योंकि ऊंचाई पर जाने से ये बीमारियां जानलेवा रूप ले सकती हैं। ऊंचाई पर केवल ऑक्सीजन की कमी ही नहीं, बल्कि अत्यधिक ठंड, कम नमी और तेज पराबैंगनी किरणें भी स्वास्थ्य पर सीधा असर डालती हैं। यात्रियों को पर्याप्त गर्म कपड़े, सनस्क्रीन और शरीर में पानी की मात्रा (Hydration) बनाए रखने की सलाह दी गई है। शासन-प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रा मार्ग पर मेडिकल रिलीफ पोस्ट और एम्बुलेंस की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन यात्रियों की अपनी सतर्कता ही उनकी सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है। यूनिवर्सिटी ने अपनी वेबसाइट पर भी यह परामर्श साझा किया है ताकि तीर्थयात्री मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार होकर देवभूमि आएं।